इंदौर त्रासदी पर राहुल गांधी का भाजपा सरकार पर तीखा हमला; पानी, हवा और दवा में ज़हर, जवाब मांगो तो चलेगा बुलडोजर
नई दिल्ली/इंदौर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार पर बड़ा हमला बोला है। राहुल गांधी ने भाजपा के स्मार्ट सिटी मॉडल पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इस व्यवस्था में गरीबों की जान की कोई कीमत नहीं है और जवाबदेही मांगने पर बुलडोजर की धमकी दी जाती है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए भाजपा सरकार की नीतियों को घेरा। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा- ‘भाजपा की डबल इंजन सरकार का नया स्मार्ट सिटी मॉडल—पानी में ज़हर, हवा में ज़हर, दवा में ज़हर, ज़मीन में ज़हर, और जवाब मांगो तो चलेगा बुलडोजर!’ कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि इस प्रशासनिक मॉडल में लापरवाही से होने वाली मौतों के लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता। उन्होंने इंदौर की घटना को सरकारी लापरवाही करार दिया।
इंदौर त्रासदी : मुआवजे और न्याय की मांग
हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में सीवेज मिला दूषित पानी पीने से कई लोगों की मृत्यु हो गई और सैकड़ों लोग बीमार होकर अस्पतालों में भर्ती हैं। इस मानवीय त्रासदी पर दुख व्यक्त करते हुए राहुल गांधी ने सरकार से तीन प्रमुख मांगें की हैं:
जवाबदेही तय हो : इंदौर त्रासदी की जिम्मेदारी सरकार तुरंत स्वीकार करे।
दोषियों को सजा : लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ज़िम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
मुआवजा और इलाज: पीड़ितों को बेहतर चिकित्सा सुविधा और उनके परिवारों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए।
गरीबों की मौतों के लिए कोई जिम्मेदार नहीं
राहुल गांधी ने अपने बयान में तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के शासन में गरीब बेबस है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब जनता बुनियादी सुविधाओं जैसे साफ पानी और शुद्ध हवा की मांग करती है, तो प्रशासन समाधान देने के बजाय दमनकारी नीतियों का सहारा लेता है।
क्या है इंदौर जल संकट?
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर के अंतिम सप्ताह और जनवरी की शुरुआत में पेयजल पाइपलाइन में सीवेज का पानी मिलने से डायरिया का भीषण प्रकोप फैला। आधिकारिक तौर पर मौतों का आंकड़ा कम बताया जा रहा है, लेकिन स्थानीय निवासियों और विपक्षी दलों का दावा है कि इस लापरवाही के कारण अब तक 15 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है।

