सरोकार

पेयजल योजना पूरी होने के बाद भी पानी को भटक रहे हैं ग्रामीण, विभाग कर रहा बिल थमाने की तैयारी

पौड़ी(गढ़वाल)। रामकुंड-कादेखाल पंपिंग पेयजल योजना को बने करीब चार साल बीत जाने के बावजूद विकासखंड कोट के 10 से 12 गांवों में आज तक घरों तक पानी नहीं पहुंच पाया है। सबदरखाल, कोटा, चमोली, पाबौ, ध्यानी, धमुंड और चपरोली समेत गांवों की करीब एक हजार से अधिक आबादी लंबे समय से पेयजल संकट से जूझ रही है। हैरानी की बात यह है कि सभी गांवों में पेयजल लाइन बिछाए जाने के आधार पर विभाग की ओर से पानी के बिल भेजने की तैयारी की जा रही है, जबकि कई गांवों में अब तक एक बूंद पानी भी आपूर्ति नहीं हो पाई है। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए हैंडपंपों और प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना के तहत पंप को प्रतिदिन कम से कम 16 घंटे चलाया जाना चाहिए, लेकिन मानव संसाधन की कमी के चलते पंप केवल 5 से 6 घंटे ही चल पा रहे हैं, जिससे कई गांवों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। गौरतलब है कि जिन गांवों में बीते चार साल से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है, वहां भी केवल लाइन बिछने के आधार पर बिल वसूली की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसी बीच जल निगम ने बिलिंग प्रक्रिया शुरू करने के लिए उपभोक्ताओं से आधार कार्ड मंगवाने शुरू कर दिए हैं। बताया गया कि इस गंभीर समस्या को लेकर अभियंताओं ने 17 जनवरी के बाद सबदरखाल कस्बे में बैठक बुलाने की बात कही थी, लेकिन वह बैठक भी अब तक नहीं हो सकी है।
तीन बार पाइप बिछाने पर भी नहीं पहुंचा पानी  :   बकरोड़ा के वार्ड सदस्य हेमंत चौहान ने बताया कि रामकुंड- कादेखाल पपिंग योजना को बने करीब चार साल हो गए हैं लेकिन अभी तक कई घरों में पानी नहीं पहुंचा। धमुंड, चमोली, पलोटा आदि गांवों में जल विभाग ने कई बार पाइप लाइनें बदलीं तब भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। कुछ दिनों पूर्व ही कोटा में तीन-तीन बार तो ध्यानी गांव में एक बार पाइप लाइनें बिछाई जा चुकी हैं। तब भी समस्या जस की तस बनी हुई है।

‘ब्लॉक के लिए 1.15 एमएलडी की रामकुंड- कादेखाल पंपिंग योजना बनायी गई थी। कोटा में पहले पानी की किल्लत थी, जिसे अब निस्तारित कर दिया गया है। हालांकि उचित वितरण की कमी के चलते कई गांवों में आज भी पानी नहीं पहुंच रहा। जबकि कुछ गांवों में पानी पर्याप्त मात्रा में है। उपभोक्ताओं से बिल भुगतान के लिए प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही बिल भी थमाए जाएंगे।’
– रुचि असवाल, सहायक अभयंता, जल निगम पौड़ी

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