उत्तराखंड

अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने राजधानी में जुटी महापंचायत, हत्याकांड के आरोपी वीआईपी की गिरफ्तारी की उठाई मांग

 

देहरादून। अंकिता भंडारी प्रकरण पर उत्तराखंड में गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले में आज कांग्रेस समेत 40 संगठनों ने देहरादून परेड ग्राउंड में महापंचायत का आयोजन किया है। अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक संगठनों ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।रविवार को सुबह 10 बजे से राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन, आंदोलनकारी संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता एकत्रित होने शुरू हो गए थे। आंदोलनकारी मंच की संरक्षक कमला पंत ने बताया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआइपी के नाम के खुलासे की निष्पक्ष जांच एवं दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग महापंचायत का मुख्य मुद्दा है।  इस दौरान सुरक्षा में किसी तरह की चूक न हो इसका ध्यान रखते हुए भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई ।

अंकिता के माता-पिता भी पहुंचे:
वक्ताओं ने अंकिता हत्याकांड के आरोपी वीआईपी की गिरफ्तारी की मांग को प्रमुखता से उठाया। बारी – बारी से विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन उत्तराखंड महिला मंच की पदाधिकारी निर्मला बिष्ट ने किया। महापंचायत में पूर्व सीएम हरीश रावत और अंकिता के माता पिता भी शामिल हुए!

वीआईपी को बचाने के लिए इंडिया गठबंधन एक साथ:
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि वर्तमान जांच केवल वीआईपी को बचाने के लिए की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंडिया गठबंधन इस जांच को पूरी तरह खारिज करता है। रावत ने कहा कि जन भावनाओं के अनुरूप, उच्चतम न्यायालय की देखरेख में सीबीआई जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि शिकायतकर्ता की शिकायत के आधार पर की जा रही सीबीआई जांच पूरी तरह छलावा है। हरीश रावत ने आगे कहा कि इस केस में जिस शिकायतकर्ता की शिकायत को आधार बनाकर जांच की जा रही है, वह सरकार द्वारा प्रायोजित है। उन्होंने उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा पर लगातार डाका, उनके साथ दुर्व्यवहार और दुष्कर्म की घटनाओं को रेखांकित किया। रावत ने कहा कि इसमें कामकाजी महिलाएं भी शामिल हैं।   रावत ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में देहरादून जिले में तीन महिलाओं की हत्या की गई। उनका कहना था कि यह दर्शाता है कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार विफल है।
महापंचायत में पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ सत्यनारायण सचान ने कहा मुख्यमंत्री पुष्कर धामी अंकिता मामले की सीबीआई जांच पर्यावरणविद की एफआईआर को आधार बनाकर करवा रहे हैं, जबकि सीबीआई जांच उस व्यक्ति की तहरीर पर नहीं बल्कि अंकित के माता-पिता की तहरीर के आधार पर होनी चाहिए। यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए। उन्होंने कहा जिन लोगों ने साक्ष्य मिटाये, उनको भी सीबीआई जांच की परिधि में लाया जाए।
डॉ सचान ने कहा कि जिन्होंने वसंत विहार थाने में अंकिता केस मे तहरीर दी है, उनका कोई संबंध अंकिता के परिवार से नहीं है, और ना ही वह किसी आंदोलन में नजर आए। इसलिए उनकी भी जांच होनी चाहिए। उनके मोबाइल की भी जांच की जानी चाहिए कि उनकी इस संबंध में किससे बातें हुई है।
भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में भाजपा सरकार शुरू से वीआईपी बचाने की कोशिश करती आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में संदिग्ध रूप से एक व्यक्ति को शिकायतकर्ता बनाया गया है, जिसका अंकिता के परिवार से कोई संबंध नहीं, न ही वह पीड़ित या पक्षकार है। उनका कहना था कि यह पूरी कोशिश सीबीआई जांच के जरिए वीआईपी को बचाने की है।

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