रांसी गांव में 22 साल बाद आयोजित पौराणिक नारायण जागर में भारी संख्या में पहुंचे स्थानीय और  बाहर से आए श्रद्धालु

वीरेन्द्र बर्त्वाल ‘‘वीरेन’’

रुद्रप्रयाग। पंचकेदार में से तीन केदार इसी जनपद में स्थित हैं। उन्हीं में द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर  के यात्रा मार्ग में पड़ने वाले रांसी गांव में माता चन्द्र कल्याणी, राकेश्वरी का मंदिर है। यहां  पर 8 गांव जुला के ग्रामीणों द्वारा पूरे 22 साल बाद  पौराणिक जागरों का भव्य आयोजन किया गया। गौरतलब है कि जागरों के माध्यम से भगवान नारायण व भगवती राकेश्वरी सहित 33 कोटि देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है।संगीत के माध्यम  से देवताओं का आह्वान किया जाता है। इसमें जगरिया, महाभारत या रामायण जैसे महान महाकाव्यों के संकेतों के साथ देवताओं का गीत गाते हैं, जिसमें भगवान नारायण का आह्वान किया जाता है। इस गांव में जगरिया के पास लोकगीत या लोकगाथाएँ गाने की विशेष कला होती है जो अपने गीतों में छंद, रस के अनुसार भगवान नरायण शिव , देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं। इस प्रकार की परंपराओं का निरंतर निर्वाह कर आठ गांव के लोगों की यह एक बहुत सराहनीय पहल है। अपनी संस्कृति और विरासत को अगली पीढ़ी के लिए संजोने में जागर का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।जागर के इस धार्मिक पहलू के अलावा जागर गीत और गायन शैलियां उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं।  इस प्रकार रांसी गांव में नारायण भगवान के स्थानीय जागरियों द्वारा गाये जाने वाले जागरों  में शोध करने योग्य जानकारियां समाहित हैं। जागर विषय पर शोधकर्ताओं  को बहुउपयोगी जानकारियां प्राप्त हो सकती हैं।  इस कार्यक्रम में भारी संख्या  में लोगों भीड उमड़ी। यही नहीं, आठ गांव के लोगों के साथ बाहर से भी कई जागर प्रेमी इन जागरों को देखने, सुनने व समझने के लिए रांसी चन्द्र कल्याणी राकेश्वरी मंदिर पहुंचे। वास्तव में आठ गांवों के लोगों की जागर आयोजन के प्रति निष्ठा और सच्ची श्रद्धा ने सभी का मन मोह लिया। ग्रामीणों द्वारा रात्रिकाल में बाहरी क्षेत्र से आये अतिथियों के लिए भण्डारे और ठहरने की उचित व्यवस्था की गयी। शनिवार को सायं 7 बजे से जागर का आयोजन शुरू किया गया और यह सिलसिला अगली सुबह तक चलता रहा।  इसके बाद आठ गांवों के लोगों और बाहर से आये अतिथियों ने गांव के खाली खेतों में सैकड़ों की संख्या में पंगत में बैठकर भण्डारे का प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद देवडोलियों ने नृत्य कर त्रिकोणीतीर्थ में स्नान किया तथा शुद्धीकरण यज्ञ कर जागर कार्यक्रम का समापन हुआ। रांसी गांव की प्रधान कुंती देवी नेगी ने पौराणिक मांगलिक जागर के इस भव्य आयोजन के लिए 8 जुला गांवों के ग्रामीणों और जन्रप्रतिनिधिगणों  का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पुनीत कार्य में सभी ने बढ़चढ़कर कार्यक्रम को सफल में अपना सम्पूर्ण योगदान दिया। उन्होंने  मां  राकेश्वरी से सभी के सफल जीवन और खुशहाली की कामना की।

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