कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत SDM व तहसीलदार को लगाई फटकार, रिटायर्ड  सर्वेअमीन से भूमि की पैमाइश कराने पर हुए नाराज

हल्द्वानी।  नेकदिल इंसान होने के साथ ही  सख़्त प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर चर्चित उत्तराखंड के वरिष्ठ आईएएस अफसर दीपक रावत अपनी विशिष्ट कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। वर्तमान में कुमाऊं के कमिश्नर दीपक रावत अपने जनोन्मुखी एवं सरल व्यवहार के चलते लोगों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। लोगों की समस्याओं व शिकायतों के समाधान को लेकर उनकी तत्परता जन सुनवाई जैसे प्रशासनिक कार्यक्रमों में अक्सर देखने को मिलती है। शनिवार को आयोजित जनता दरबार में कमिश्नर रावत ने इसी अंदाज  में फर्जअदायगी की। इस अवसर पर जहांं  उन्होंने शिकायतकर्ताओं की पि़छले शनिवार को दर्ज शिकायतों पर हुई  कार्रवाई की समीक्षा की वहीं उन्होंने फरियादियों द्वारा दर्ज कराई गई पेयजल, सड़क, पेंशन, भूमि, अतिक्रमण विद्युत आदि से जुड़ी समस्याएं और शिकायतें सुनीं। अधिकांश शिकायतों का कमिश्नर दीपक रावत द्वारा मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया।
रामनगर तहसील में सेवानिवृत्त सर्वे अमीन द्वारा भूमि की पैमाइश कराये जाने का मामला सामने आने पर कमिश्नर दीपक रावत का पारा चढ़ गया। उन्होंने तत्काल दूरभाष से रामनगर के एसडीएम व तहसीलदार को नाराजगी जताते हुए कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि सेवानिवृत्त अमीनों से तहसील रामनगर द्वारा भूमि की पैमाइश कराना न्यायसंगत नहीं है, जबकि वर्तमान में किसी भी सेवानिवृत्त अमीन को भूमि की पैमाइश का लाइसेन्स नहीं दिया गया है। कमिश्नर ने एसडीएम रामनगर को आखिरी चेतावनी देते हुए कहा कि पुनः इस प्रकार के प्रकरण आने पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी। साथ ही समस्त एसडीएम को आदेश दिया कि राजस्व विभाग अपने अधीनस्थ से ही राजस्व के अभिलेख व कार्यों का निर्वहन कराये अन्यथा सम्बन्धित अ़धिकारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की  जायेगी।
कमोला निवासी विमला बिष्ट ने बताया कि उनके पिताजी व गुमान सिंह ने आपसी सलाह मशविरे से जमीन की अदला बदली की थी, जिससे दोनों को अपने घर के नजदीक ही जमीन मिल जाये। गुमान सिंह द्वारा बदले में ली गई जमीन अपने नाम कर ली गई किंतु गुमान सिंह द्वारा जो जमीन विमला बिष्ट के पिताजी को दी गई थी, वह बैंक में बंधक होने के कारण भूमि का दाखिल खारिज नहीं हो पा रहा है। इस सम्बंध में कमिश्नर ने आगामी शनिवार को दोनों पक्षों को बुलाने को कहा, जिससे आपसी समझौते से मामले का निस्तारण हो सके व दूसरे पक्ष को भी सुना जा सके।

हल्दूचौड़ निवासी चिंतामणि  द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा वर्ष 2016 में ग्राम हल्दूचौड़, लालकुआं में भुवन चन्द्र धारियाल से 1400 वर्ग फिट का प्लाट क्रय किया गया था किंतु आज की तिथि तक उसका दाखिल खारिज नहीं हो पाया है क्योंकि भूमि में रकबा नहीं है व उनके साथ भूमि फ्रॉड हुआ है। इस पर कमिश्नर दीपक रावत ने उक्त प्रकरण को लैंड फ्रॉड समिति में शामिल करते हुए आगे कार्रवाई करने का भरोसा गिलाया।
इस मौके पर भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी द्वारा बताया गया कि बन्नाखेड़ा रेंज, बैलपड़ाव में आरक्षित वन भूमि 2.4240 हेक्टयर आरक्षित वन क्षेत्र को राजस्व अभिलेखों में खसरा नम्बर 395/776 दर्ज किया गया है व 1997 से पूर्व आरक्षित वन क्षेत्र में दर्ज थी तथा 1997 में भूमि का बंदोबस्त किया गया है। शिकायत का संज्ञान लेते हुए कमिश्नर ने कहा कि बंदोबस्त भूमि की जांच हेतु राजस्व व वन विभाग को नामित कर दिया गया है, अनियिमितता पाए जाने पर धारा 28 में नक्शा दुरुस्ती की कार्रवाई की जायगी।
इस अवसर पर उपजिलाधिकारी हल्द्वानी मनीष सिंह व कालाढूंगी रेखा कोहली सहित अन्य अधिकारी व भारी संख्या में फरियादी उपस्थित थे।

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