कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने लगाया आरोप,नारी सुरक्षा के सरकार के दावे खोखले
देहरादून। राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से हाल ही में जारी एनएआरआई-2025 रिपोर्ट ने राजधानी देहरादून को महिलाओं की सुरक्षा के मामले में 10 असुरक्षित शहरों की श्रेणी में रखा गया है। इसको लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा की यह भयावह स्थिति भाजपा सरकार की विफलता को उजागर करती है। पार्टी प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि भाजपा सरकार की ओर से बड़े-बड़े दावे करने के बावजूद सच्चाई यह है कि महिलाएं आज भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं। रिपोर्ट साफ तौर पर दिखाती है कि राज्य में पुलिसिंग, ढांचा और जनविश्वास तीनों में गहरी खाई है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकारें महिला सशक्तीकरण की बात करना छोड़ दें, क्योंकि उनका बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा आज खोखला साबित हो रहा है। महिला सुरक्षा को लेकर दसौनी ने मांग की है कि संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए, अंधेरे इलाकों में रोशनी और सीसीटीवी लगाए जाएं। आपातकालीन हेल्प सिस्टम (पैनिक बटन जैसी व्यवस्था) स्थापित की जाए। उत्तराखंड में निर्भया फंड के उपयोग का पारदर्शी ऑडिट हो, ताकि महिलाओं की सुरक्षा के लिए तय पैसा बर्बाद या बिना उपयोग के न पड़ा रहे। इसके अलावा विशेष महिला सुरक्षा टास्क फोर्स और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र (हेल्पलाइन और वन-स्टॉप सेंटर सहित) की स्थापना की जाए।
अतिवृष्टि के चलते जौनसार बावर के 10 मोटर मार्गों पर रहा यातायात ठप , ग्रामीणों की दिनचर्या प्रभावित
विकासनगर। लगातार हो रही बारिश के कारण रविवार को कालसी-चकराता मोटर मार्ग समेत जौनसार बावर के कुल 10 मार्गों पर यातायात ठप रहा। बार-बार मार्ग बंद होने से ग्रामीणों की आर्थिकी पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। ड्यूडलानी-चंदेऊ-कामला मोटर मार्ग पर दो माह से यातायात ठप होने के कारण स्थानीय ग्रामीणों को रोजमर्रा का सामान लेने के लिए भी चार से पांच किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ रही है। रविवार को हुई बारिश से कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर जजरेड़ भू स्खलन जोन एक बार फिर सक्रिय हो गया। भारी मात्रा में मलबा, बोल्डर आने से दोपहर एक बजे मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। हालांकि मौके पर मौजूद जेसीबी से लोनिवि कर्मियों ने मलबा हटाकर आधे घंटे में यातायात बहाल कर दिया था, लेकिन लगातार बारिश के कारण रुक-रुक कर मलबा आने का सिलसिला जारी रहा, जिससे कई बार यातायात भी बाधित होता रहा। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले हरिपुर-कोटी-इच्छाड़ी मोटर मार्ग पर भी यातायात ठप रहने से जौनसार के डेढ़ सौ गांवों के साथ ही हिमाचल प्रदेश के पचास गांवों की आबादी प्रभावित हुई। जबकि ड्यूडलानी-चंदेऊ-कामला मोटर मार्ग पर बीते दो माह से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है। साहिया-क्वानू, बिजऊ-कुइथा-खतार, कोठा-बैंड-खतार, सुरेऊ-भंजरा, ध्वैरा-देऊ, कलाम-रड़्-डिमीच और रेनसा-पानेसा मोटर मार्ग पर भी यातायात ठप रहा। मार्गों पर आवाजाही ठप होने से वाहनो की लंबी कतारें लग गई। स्थानीय काश्तकारों ने बताया कि मार्गों के बंद होने से नगदी फसलें घरों और खेतों में ही बर्बाद होने लगी हैं। हर साल बरसात में कई दिनों तक मार्ग पर यातायात बाधित रहता है, बावजूद इसके बरसात से पहले कोई पुख्ता उपाय नहीं किए जाते हैं। उधर, लोनिवि चकराता के अधिशासी अभियंता नीरज त्रिपाठी, लोनिवि साहिया की अधिशासी अभियंता रचना थपलिया, पीएमजीएसवाई के ईई रोहित श्रीवास्तव ने बताया कि बंद मार्गों को खोलने के लिए जेसीबी भेज दी गई हैं। जल्द सभी मार्गों पर यातायात बहाल कर दिया जाएगा।
उत्तराखंड में युद्धस्तर पर जारी हैं आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्य, अधिकतर यातायात बहाल
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व और सतत निगरानी में प्रदेश में आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। भारी बारिश व मलबा आने से प्रदेश में कुल 1827 स्थानों पर सड़कें बाधित हुई थीं। इनमें से 1747 सड़कों को खोला जा चुका है, जबकि 80 सड़कों पर कार्यवाही गतिमान है। इस प्रकार मलबे और भू स्खलन से बंद हुई अब तक 95.62 प्रतिषत सड़कों पर यातायात बहाल किया जा चुका है। जहाँ-जहाँ मलबा आने की संभावना थी, वहाँ पहले से ही जेसीबी और आवश्यक संसाधनों की तैनाती की गई थी। सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि सड़क बंद होने की स्थिति में तत्काल कार्यवाही प्रारम्भ कर दी जाए। परिणामस्वरूप प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें तेज़ी से खोली जा रही हैं और लोगों को राहत मिल रही है। ज्ञातव्य है कि इस वर्ष प्रदेश में पिछले कई वर्षों की तुलना में अधिक बारिश हो रही है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री धामी स्वयं लगातार आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं और राहत व बचाव कार्यों की नियमित समीक्षा कर रहे हैं।
‘प्रदेशवासियों की सुरक्षा और सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में किसी भी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए सड़क, बिजली, पानी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बहाल करने की निरंतर निगरानी की जा रही है। सभी विभाग समन्वय बनाकर त्वरित राहत व बचाव कार्य कर रहे हैं।’
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
परहेज: यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का इलाज करने के लिए न खाएं ये 5 चीजें
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) एक आम समस्या है, जो किसी को भी प्रभावित कर सकती है। यह तब होता है जब बैक्टीरिया मूत्र पथ में प्रवेश करते हैं और वहां बढ़ते हैं। इसके लक्षणों में पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना और पेशाब का रंग गंदा होना शामिल है। यूटीआई का इलाज करने के लिए कई लोग घरेलू उपाय अपनाते हैं, लेकिन कुछ खाने-पीने की चीजें इस संक्रमण को बढ़ा सकती हैं।
कैफीन युक्त चीजों से बनाएं दूरी
चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स जैसी कैफीन वाली चीजें मूत्राशय की मांसपेशियों को उत्तेजित करती हैं, जिससे बार-बार पेशाब की इच्छा होती है। इससे मूत्र पथ में जलन और दर्द हो सकता है। इसलिए यूटीआई के दौरान इन पेय पदार्थों का सेवन न करें। इसके बजाय पानी या नारियल पानी पिएं। नारियल पानी पीने से पेशाब का रंग साफ हो सकता है और यह संक्रमण को कम करने में मदद कर सकता है।
शराब का सेवन न करें
शराब का सेवन यूटीआई के मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है। शराब शरीर को पानी की कमी में डाल देती है और पेशाब की इच्छा को बढ़ा देती है, जिससे जलन और दर्द बढ़ सकता है। इसके अलावा शराब के कारण मूत्राशय की मांसपेशियां भी उत्तेजित होती हैं, जिससे समस्या और बढ़ सकती है। इसलिए यूटीआई के दौरान शराब से पूरी तरह बचना चाहिए। इसके बजाय पानी या नारियल पानी पीना बेहतर है।
मसालेदार खाना न खाएं
मसालेदार खाने से पेट में जलन हो सकती है, जिससे यूटीआई के मरीजों को परेशानी हो सकती है। मसालेदार खाने से पेट में जलन और गैस बन सकती है, जो मूत्राशय को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा मसालेदार खाने से पेशाब करते समय जलन भी बढ़ सकती है। इसलिए यूटीआई के दौरान अधिक मसालेदार खाने से बचना चाहिए। इसके बजाय हल्का और पौष्टिक खाना खाएं, जो पेट को आराम दे और संक्रमण को कम करे।
अधिक खट्टे चीजों का सेवन न करें
अधिक खट्टे चीजों जैसे नींबू या संतरे का रस भी यूटीआई के दौरान नहीं पीना चाहिए। इनका सेवन करने से पेट में जलन हो सकती है, जिससे समस्या और बढ़ सकती है। इसके अलावा खट्टे चीजों से पेशाब करते समय जलन भी बढ़ सकती है। इसलिए यूटीआई के दौरान अधिक खट्टे चीजों से बचना चाहिए। इसके बजाय पानी या नारियल पानी पीना बेहतर है, जो पेट को आराम दे और संक्रमण को कम करे।
डेयरी उत्पादों का सेवन भी है नुकसानदायक
डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही आदि का सेवन भी यूटीआई के मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है। इनमें चर्बी अधिक होती है, जो पेट में जलन पैदा कर सकती है और संक्रमण को बढ़ा सकती है। इसके अलावा डेयरी उत्पादों से पेशाब करते समय जलन भी बढ़ सकती है। इसलिए यूटीआई के दौरान डेयरी उत्पादों से बचना चाहिए। इसके बजाय हल्का और पौष्टिक खाना खाएं, जो पेट को आराम दे और संक्रमण को कम करे।
