लोनिवि नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बने सतपाल सैनी

देहरादून। यमुना कॉलोनी स्थित मेट सिंचाई संघ के संघ भवन में उत्तराखंड फील्ड कर्मचारी महासंघ लोक निर्माण विभाग एवं सिंचाई विभाग की एक प्रदेशव्यापी बैठक हुई। बैठक में मुख्य अतिथि राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के संरक्षक चौधरी ओमवीर सिंह थे।

सभा की अध्यक्षता लोक निर्माण विभाग नियमित वर्क चार्ज कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हिकमत सिंह नेगी ने की। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष जयप्रकाश यादव के सेवानिवृत्ति होने के उपरांत महासंघ की कार्यकारिणी का दोबारा से गठन किया गया। जिसमें सर्व सहमति से प्रदेश अध्यक्ष के लिए सतपाल सैनी को निर्विरोध चुना गया। महामंत्री दिगपाल सिंह बिष्ट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओमप्रकाश भट्ट, उपाध्यक्ष रामकुमार शर्मा, गढ़वाल मंडल उपाध्यक्ष ललित मोहन शर्मा, कुमाऊँ मंडल एवं कोषाध्यक्ष के लिए राजेश प्रसाद को चुना गया।

प्रदेश कार्यकारिणी गठन के बाद वक्ताओं ने सरकार द्वारा 8 मई को लाये गए गजट पर सभी ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। सरकार की इस नीति को कर्मचारी विरोधी बताते हुए इसका विरोध करने का निर्णय लिया गया। सर्व सहमति से प्रदेश कार्यकारिणी ने निर्णय लिया कि शीघ्र ही इसके खिलाफ प्रदेश व्यापी आंदोलन चलाकर गांधी पार्क  पर एक दिवसीय धरना और प्रदेशव्यापी महारैली का आयोजन कर इस पर अपनी आपत्ती दर्ज कराएगी। सरकार से मांग की जायेगी कि इस गजट में तुरंत संशोधन किया जाए क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय और उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट के फैसले के उपरांत ही कर्मचारियों को वर्कचार्ज की।

सेवा को जोड़ते हुए पेंशन का लाभ दिया गया। अब सरकार द्वारा बजट के माध्यम से इस पर रोक लगा दी गई। जो कि सरासर कर्मचारियों के साथ अन्याय है। जब से बजट पारित हुआ तब से आज तक कई सेवानिवृत कर्मचारी को पेंशन एवं अन्य लाभ से वंचित रखा हुआ है। कई कर्मचारियों को तो मृत्यु भी हो गई है। उनके परिवार भुखमरी के कगार पर खड़े हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जो कर्मचारी 1995 का नियमित है और पुरानी पेंशन का लाभ लेने वाला है उसकी भी पेंशन पर इस गजट का ग्रहण लगा हुआ है।

कहा कि सभी कोषागार द्वारा उनके पेंशन प्रकरण वर्कचार्ज की सेवा का हवाला देते हुए रोक रखे हैं कि जब तक सरकार और शासन से कोई दिशा निर्देश नहीं आ जाता तब तक इनको भी पेंशन देना संभव नहीं है क्योंकि इन्होंने भी वर्कचार्ज की सेवा कर रखी है। महासंघ सरकार से मांग करता है की कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए ही सरकार और शासन निर्णय ले अन्यथा मजबूर होकर कर्मचारी किसी भी आंदोलन धरना प्रदर्शन के लिए बाघ्य होंगे।

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