उत्तराखंड

बिंदुखत्ता में राजस्व ग्राम की मांग को लेकर उग्र होता जनआंदोलन, पहले दिन 12 घंटे का क्रमिक अनशन; 6 मई को निर्णायक जनसभा

बिंदुखत्ता (नैनीताल)।
पर्वतीय मूल के सैनिक बाहुल्य क्षेत्र बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर क्षेत्र में जनआंदोलन अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। वन अधिकार संगठन एवं पूर्व सैनिक संगठन, बिंदुखत्ता के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार से शुरू हुए इस आंदोलन को पहले ही दिन व्यापक जनसमर्थन मिला।

शहीद स्मारक, बिंदुखत्ता में आयोजित कार्यक्रम के तहत आंदोलन के प्रथम दिन 12 घंटे के क्रमिक अनशन का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लेकर अपनी एकजुटता दिखाई। क्रमिक अनशन में अर्जुन नाथ गोस्वामी (अध्यक्ष, वन अधिकार समिति), मोहिनी मेहता, संध्या डालाकोटी (पूर्व ब्लॉक प्रमुख), ममता बिष्ट, प्रकाश उत्तराखंडी, ललित कांडपाल, विक्की पाठक, पूरन सिंह परिहार (राज्य आंदोलनकारी), बलवीर सिंह रावत, कुंवर सिंह पवार (पूर्व सैनिक) एवं भूपेश जोशी शामिल रहे।

इस अवसर पर वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट ने कहा कि बिंदुखत्ता के हजारों परिवार दशकों से वन भूमि पर आश्रित हैं और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत राजस्व ग्राम घोषित होने की सभी शर्तें पूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि 19 जून 2024 को जिला स्तरीय समिति (DLC) द्वारा प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन लगभग दो वर्ष बाद भी अधिसूचना जारी नहीं होना गंभीर प्रशासनिक उदासीनता है।

पूर्व ब्लॉक प्रमुख संध्या डालाकोटी ने अपने संबोधन में कहा, बिंदुखत्ता की जनता वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है। सरकार को अब संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल निर्णय लेना चाहिए। यदि हमारी जायज मांगों की अनदेखी जारी रही, तो यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा और इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

वहीं अर्जुन नाथ गोस्वामी ने कहा, हम किसी के विरोध में नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करना हमारा संवैधानिक अधिकार है और इसे अब और टाला नही जा सकता।

क्रमिक अनशन में शामिल प्रकाश उत्तराखंडी (राज्य आंदोलनकारी) ने कहा,
हमने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी संघर्ष किया है और अब अपने ही क्षेत्र के अधिकारों के लिए फिर से संघर्ष करना पड़ रहा है। यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

वहीं कुंवर सिंह पवार (पूर्व सैनिक) ने कहा, देश की सेवा करने वाले पूर्व सैनिकों के परिवार आज भी मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार को तत्काल संज्ञान लेते हुए बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करना चाहिए।

आंदोलन की आगामी रणनीति पर जानकारी देते हुए आयोजकों ने बताया कि 4 से 6 मई 2026 तक “जन-जन की सरकार—कब आएगी बिंदुखत्ता के द्वार” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 6 मई को एक विशाल एवं निर्णायक जनसभा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र की जनता बड़ी संख्या में भाग लेकर आगे की दिशा तय करेगी।

आयोजकों ने यह भी बताया कि कार्यक्रम में भाग लेने हेतु माननीय मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, कुमाऊं आयुक्त, जिलाधिकारी, भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय एवं उत्तराखण्ड जनजाति निदेशालय के अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है, किंतु प्रथम दिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की उपस्थिति नहीं होने से लोगों में नाराजगी देखी गई।

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर सरकार द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह शांतिपूर्ण आंदोलन व्यापक जनआंदोलन का रूप ले लेगा और आगे की रणनीति के तहत बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा।

आंदोलन स्थल पर दिनभर जनसैलाब उमड़ा और लोगों ने बढ़-चढ़कर समर्थन दिया। इस दौरान बलवंत सम्मल, सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी, विजय सिंह दानू, बलवंत सिंह कोरंगा, केदार सिंह कोरंगा, मनोज सिंह कोरंगा, मनोज गोसाईं, नंदन सिंह कुनियाल, गोविंद सिंह, गौरव कोरंगा, हीरा सिंह बिष्ट, बसंत पांडे, रणजीत सिंह, नारायण कोरंगा सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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