लंबे समय से पहाड़ों में नहीं हुई बारिश और बर्फबारी, सेब उत्पादक बागवानों में निराशा व्याप्त
नई टिहरी। बारिश और बर्फबारी नहीं होने के कारण थौलधार के सेब उत्पादकों में निराशा छाई हुई है। क्षेत्र में कई लोग सेब उत्पादन से ही अपनी आजीविका चलाते हैं लेकिन जनवरी का आधा माह बीतने के बाद भी बारिश नहीं होने से उन्हें भारी नुकसान की चिंता सताने लगी है। उत्पादकों ने उचित मुआवजा देने की मांग की है।
थौलधार ब्लॉक में गुसाईं पट्टी, नगुण जूवा और उदयपुर पट्टी में ऊपरी क्षेत्र के दर्जनों काश्तकार सेब का उत्पादन करते हैं लेकिन जनवरी का पूरा महीना इसी तरह बिना बारिश और बर्फबारी के ही गुजरता है, तो सेब उत्पादन की पूरी उम्मीदें क्षीण हो जाएगी। क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेंद्र सिंह पंवार, विनोद सिंह राणा और नयन सिंह गुसाईं ने बताया कि मौसम की यही बेरुखी रही तो सेब उत्पादन से आजीविका चलाने वाले उत्पादकों के सामने परिवार के भरण-पोषण की समस्या पैदा हो जाएगी। घाटी वाले क्षेत्र में भी गेहूं, जौ, सरसों, मटर और आलू आदि की फसल भी कहीं नजर नहीं आ रही है। जौनपुर ब्लॉक में भी बड़ी संख्या में उद्यानीकरण से जुड़े किसान सेब, आडू, खुमानी, पुलम और चुल्लू का उत्पादन करते हैं लेकिन बारिश और बर्फबारी नहीं होने के कारण उत्पादन की उम्मीद नहीं है।
काश्तकार महिपाल सिंह रावत, लोकेंद्र सिंह सजवाण, रतनमणि, जगत सिंह राणा, वीर सिंह राणा और विमल नौटियाल ने बताया कि सेब का बागीचा तैयार करने में काफी पैसा खर्च होता है। किसानों ने बीज भंडार से हजारों के गेहूं, मसूर और मटर के बीज खरीद कर बुवाई की थी लेकिन बारिश नहीं होने के कारण नुकसान होना तय है। उन्होंने इस मौसम को सूखाग्रस्त घोषित कर मुआवजा देने की मांग की है। ब्लॉक कृषि अधिकारी सुनील डोगरा ने कहा कि आठ-दस दिन में बारिश नहीं होती है, तो नुकसान रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।
‘सेब की अच्छी पैदावार के लिए करीब एक- डेढ़ महीने तक आठ डिग्री सेल्सियस से कम तापमान जरूरी है। अब भी अगर बारिश और बर्फबारी नहीं होती है तो फल की गुणवत्ता खराब होने की संभावना है। मुआवजे का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा।’
– अतर सिंह थलवाल, ब्लॉक उद्यान अधिकारी थौलधार।

