कांग्रेस में शुरू हुई प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्ति की कवायद

देहरादून। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के इस्तीफा देने के बाद अब नए प्रदेश अध्यक्ष की जंग शुरू हो गई और इसी को लेकर कांग्रेस हाई कमान ने कांग्रेस के महासचिव और झारखण्ड प्रभारी अविनाश पांडे को देहरादून वरिष्ठ कांग्रेस जनों का मन टटोलने के भेजने का निर्णय लिया है जो एक दो दिन में उत्तराखंड आकर यह काम करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कई नाम चर्चा में है और नेता प्रतिपक्ष के लिए भी। प्रदेश अध्यक्ष के लिए मुख्य नामों में भुवन कापड़ी, प्रकाश जोशी और मनोज तिवारी के नाम चर्चा में है तो प्रीतम सिंह, विक्रम नेगी और राजेंद्र भंडारी के नाम नेता प्रतिपक्ष के लिए सामने आ रहे हैं। इनसे अलग यशपाल आर्य ऐसे नेता हैं जिन्हें पार्टी अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष में से एक न एक की जिम्मेदारी अवश्य सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है।

 

अध्यक्ष के चेहरों के पक्ष विपक्ष-
आलाकमान के अनुसार संभवतः पहले अध्यक्ष पद का निर्णय लिया जाना है तथा नेता प्रतिपक्ष का निर्णय बाद में समीकरणों को देख़ कर लिया जा सकता है। वर्तमान में अध्यक्ष पद के लिए 3 नाम महत्वपूर्ण चल रहे हैं। पहला नाम भुवन कापड़ी का माना जा रहा है जिसका कारण है उनका वर्तमान तक नेता प्रतिपक्ष रहे प्रीतम सिंह से नजदीकी होना। क्योंक हरीश रावत और गणेश गोदियाल की हार के बाद यदि भुवन कापड़ी को अध्यक्ष बनाया जाता है तो प्रीतम सिंह खेमे के हाथ में पूरी कमान आ जाएगी और इससे दूसरे खेमे के लोगों को किनारे लगने का भय रहेगा। दूसरी समस्या भुवन कापड़ी के साथ चुनाव के समय लीक हुई उनकी वीडियो है, जिसमें वह खुलकर खनन के काम के लिए सौदेबाजी कर रहे थे। चुनाव में यह वीडियो 12 फरवरी को जारी हुई तो इसका प्रभाव अधिक नहीं हुआ परन्तु अध्यक्ष पद के लिए नाम चलते ही विपक्षी दलों ने वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाकर अभी से कांग्रेस संगठन पर प्रश्नचिहन लगाना शुरू कर दिया है।
दूसरा नाम प्रकाश जोशी का है, परंतु किसी गुट का नहीं होना उनका कमजोर पक्ष माना जाता है। हालाँकि वह राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस हाईकमान के नजदीकी बताए जाते हैं। पिछली बार भी वह अध्यक्ष बनते बनते रह गए थे। इस बार उनके नाम पर मोहर लगेगी या नहीं यह भविष्य के गर्भ में है।
तीसरा नाम विधायक मनोज तिवारी का है। वह हरीश रावत के नजदीकी माने जाते हैं और हरीश रावत ग्रुप की वर्तमान स्थिति को देखते हुए शायद प्रीतम सिंह खेमा उनको स्वीकार ना करे।

 

प्रीतम सिंह की रणनीति, –
कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति के अनुसार कांग्रेस के बड़े नेता हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के चुनाव हारने के बाद वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह उत्तराखंड कांग्रेस पर एक छत्र राज चाहते हैं और इसलिए वह अपने कैंप के भुवन कापड़ी को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाना चाहते हैं। चूंकि वह अश्वस्त हैं कि नेता प्रतिपक्ष वही रहेंगे तो प्रदेश अध्यक्ष अपने नजदीकी को बनवाकर उत्तराखंड की कांग्रेस संगठन पर एकाधकार हो जायेगा। दूसरी ओर उनके विरोधियों का मानना है कि प्रीतम सिंह ने न तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए प्रयास किए और न बतौर नेता प्रतिपक्ष सत्तारूढ़ भाजपा को जनमुद्दों पर असरदार ढंग से हमलों की जद में ला पाए। इसके उलट, पूरे कार्यकाल में उनकी कोशिश वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरीश रावत के राजनीतिक अभियान में रोड़े अटकाने भर की रही। यहां तक कि हरीश रावत के विरोध में सार्वजनिक मंचों से, ख़ासतौर से मीडिया में दिए गए उनके बयान पार्टी हितों के खिलाफ साबित हुए। ऐसे में अगर उनके किसी नजदीकी नेता को संगठन की कमान सौंपी जाती है तो फिर कांग्रेस संगठन की रही सही एकजुटता भी और कमजोर पड़ सकती है।

 

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