डोईवाला विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं कर्मचारी नेता बी एस रावत

 

देहरादून। विधानसभा चुनाव में उतरे विभिन्न राजनैतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच में एक ऐसे भी उम्मीदवार हैं जो बिना धनबल और संसाधनों के सिर्फ अपने दम पर चुनावी जंग लड़ रहे हैं। उनके पीछे कोई ताकत है तो रिटायर्ड और सेवारत सरकारी कर्मचारियों के समर्थन का भरोसा। यहां बात हो रही है राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ के सचिव रहे और पिछले नवम्बर माह में सेवानिवृत हो चुके कर्मचारी नेता बी एस रावत की । उन्होंने डोईवाला विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है।
उनका कहना है कि सार्वजनिक निगमों के कार्मिकों के लम्बे संघर्ष के पश्चात कार्मिकों द्वारा महसूस किया गया कि सरकार और शासन स्तर पर कार्मिकों की आवाज को दबाया जा रहा है।
इसी कारण से सेवानिवृत्त कार्मिकों द्वारा निर्णय लिया गया कि विधानसभा के अन्दर और शासन में कार्मिकों के लिये संघर्ष करने वाले प्रतिनिधि को चुनावी समर में उतारा जाय।
राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ के अध्यक्ष दिनेश गुसाईं कहते हैं कि वी एस रावत ने कार्मिकों के लिए जिंदगी भर संघर्ष किया। उन्होंने अपने क्षेत्र के मजदूरों और किसानों के हक और हितों के लिए कार्य करने के साथ ही राज्य आन्दोलन में हमेशा भागीदारी कर अपना उल्लेखनीय योगदान दिया। गुसाईं ने यकीन जताया है कि रावत को चुनाव में इसका लाभ अवश्य मिलेगा और वे भारी मतों से विजयी होंगे।
विधानसभा के लिए डोईवाला सीट पर निर्दलीय दावेदारी कर रहे बीरेन्द्र सिंह रावत का कहना है कि जल, जमीन और जंगलों में स्थानीय जनमानस को हिस्सेदारी दिलाने के साथ ही वह कार्मिकों के साथ हमेशा संघर्ष में आगे भी पूरी सहभागिता निभाते रहेंगे।
उन्होंने क्षेत्र की जनता से अनुरोध किया है कि वह हमेशा अपने साथ संघर्ष मेंं खड़े रहने वाले प्रतिनिधि को चुने ।
निर्दलीय उम्मीदवार बी एस रावत के समर्थन में ओमवीर चौधरी, दयाल सिंह रावत, अश्विनी त्यागी, आर सी विंजौला, आर एस नेगी, संदीप, विशम्बर सिंह बिष्ट, पी एस रावत व अनुराग समेत विभिन्न संगठनों से जुड़े कई कर्मचारी नेता मेहनत कर रहे हैं ।

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