पर्वतीय क्षेत्रों में दहशत का माहौल, चारापत्ती लेने गयी महिला को गुलदार ने किया घायल
कोटद्वार। प्रखंड एकेश्वर के अंतर्गत ग्राम पाथर में गुलदार के हमले में एक महिला घायल हो गई। घायल महिला को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांवखाल में लाया गया है।
प्रखंड एकेश्वर के अंतर्गत ग्राम पाथर निवासी पुष्पा देवी पत्नी राकेश रविवार शाम अन्य महिलाओं के साथ गांव के समीप जंगल में मवेशियों के लिए चारापत्ती लेने गई थी। इस बीच झाड़ियों में घात लगा कर बैठे गुलदार ने पुष्पा पर हमला कर दिया। पुष्पा देवी ने गुलदार पर दरांती से वार किया तो गुलदार जंगल की ओर चला गया। अन्य महिलाओं की सूचना के बाद गांव वाले मौके पर पहुंचे और घायल पुष्पा देवी को लेकर राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांवखाल में पहुंचे। चिकित्सकों ने पुष्पा देवी की हालत स्थिर बताई है। गौरतलब है कि बीते वर्ष ग्राम पांथर निवासी गंगा देवी गुलदार के हमले में घायल हो गई थी। चौंदकोट युवा संगठन का कहना है कि इस गांव में चार गुलदार लगातार सक्रिय हैं। ग्रामीण अपने घरों से बाहर आने में डर रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर लग रहा है। वन विभाग को बार-बार सूचित करने के बाद भी सुध नही ले रहा। ग्रामीणों कग कहना है कि विभाग पिंजरे तो लगाता है लेकिन क्षेत्रीय जन को गुलदार के आतंक से मुक्ति नहीं मिल रही है। उन्होंने ग्रामीणों अथवा गुलदार को अन्यत्र विस्थापित करने की मांग की है।संवेदना: ध्वस्तीकरण की जद में आए बस्ती के लोगों से पूर्व सीएम हरीश ने जताई हमदर्दी
प्रखंड एकेश्वर के अंतर्गत ग्राम पाथर निवासी पुष्पा देवी पत्नी राकेश रविवार शाम अन्य महिलाओं के साथ गांव के समीप जंगल में मवेशियों के लिए चारापत्ती लेने गई थी। इस बीच झाड़ियों में घात लगा कर बैठे गुलदार ने पुष्पा पर हमला कर दिया। पुष्पा देवी ने गुलदार पर दरांती से वार किया तो गुलदार जंगल की ओर चला गया। अन्य महिलाओं की सूचना के बाद गांव वाले मौके पर पहुंचे और घायल पुष्पा देवी को लेकर राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांवखाल में पहुंचे। चिकित्सकों ने पुष्पा देवी की हालत स्थिर बताई है। गौरतलब है कि बीते वर्ष ग्राम पांथर निवासी गंगा देवी गुलदार के हमले में घायल हो गई थी। चौंदकोट युवा संगठन का कहना है कि इस गांव में चार गुलदार लगातार सक्रिय हैं। ग्रामीण अपने घरों से बाहर आने में डर रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजने में भी डर लग रहा है। वन विभाग को बार-बार सूचित करने के बाद भी सुध नही ले रहा। ग्रामीणों कग कहना है कि विभाग पिंजरे तो लगाता है लेकिन क्षेत्रीय जन को गुलदार के आतंक से मुक्ति नहीं मिल रही है। उन्होंने ग्रामीणों अथवा गुलदार को अन्यत्र विस्थापित करने की मांग की है।संवेदना: ध्वस्तीकरण की जद में आए बस्ती के लोगों से पूर्व सीएम हरीश ने जताई हमदर्दी
सीएम से किया बीच का रास्ता निकालने का आग्रह
हल्द्वानी। ढोलक बस्ती, बनभूलपुरा आदि स्थानों पर रेलवे की भूमि पर बसे लोगों को हटाने के मामले में पूर्व सीएम हरीश रावत ने सीएम पुष्कर सिंह धामी को सोशल मीडिया पर खुला पत्र लिखा। कहा, कानूनी पक्ष अपनी जगह सही है, लेकिन मानवीय पक्ष देखते हुए कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्षों से बसे हुए लोगों को हटाने का रेलवे, प्रशासन, पालिका का निर्णय केवल कानूनी पक्ष नहीं है, यह मानवीय पक्ष भी है। हल्द्वानी कुमाऊं और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। यहां का सामाजिक सौहार्द हमेशा उच्च स्तर का रहा है।
यदि 50 हजार से ज्यादा लोगों को हटाया जाएगा, तो यह लोग कहां जाएंगे। एक अशांति का वातावरण पूरे हल्द्वानी में और कुमाऊं के अंचल में फैलेगा। सीएम को संबोधित करते हुए लिखा है कि कड़कड़ाती ठंड में आप केवल कानूनी पक्ष देखकर या कानून के गलत इंटरप्रिटेशन के आधार पर 50 हजार लोगों से उनकी छत छीनने जा रहे हैं।
हरदा ने लिखा है कि कुछ लोग आज भले ही चुप हों, जब स्थितियां बिगड़ेंगी तो वह लोग भी सरकार के विवेक पर अंगुली उठाएंगे। हरीश रावत ने लिखा है कि वह न्यायिक निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं, मगर राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर आप (धामी) एक अभिभावक का कर्तव्य निभा सकते हैं। उन्होंने सीएम को रेलवे से बातचीत करने, गोला नदी के किनारे-किनारे रिवरफ्रंट डेवलप कर कुछ अतिरिक्त भूमि निकालकर रेलवे की जरूरत की पूर्ति करने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि वर्षों से बसे हुए लोगों को हटाने का रेलवे, प्रशासन, पालिका का निर्णय केवल कानूनी पक्ष नहीं है, यह मानवीय पक्ष भी है। हल्द्वानी कुमाऊं और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। यहां का सामाजिक सौहार्द हमेशा उच्च स्तर का रहा है।
यदि 50 हजार से ज्यादा लोगों को हटाया जाएगा, तो यह लोग कहां जाएंगे। एक अशांति का वातावरण पूरे हल्द्वानी में और कुमाऊं के अंचल में फैलेगा। सीएम को संबोधित करते हुए लिखा है कि कड़कड़ाती ठंड में आप केवल कानूनी पक्ष देखकर या कानून के गलत इंटरप्रिटेशन के आधार पर 50 हजार लोगों से उनकी छत छीनने जा रहे हैं।
हरदा ने लिखा है कि कुछ लोग आज भले ही चुप हों, जब स्थितियां बिगड़ेंगी तो वह लोग भी सरकार के विवेक पर अंगुली उठाएंगे। हरीश रावत ने लिखा है कि वह न्यायिक निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं, मगर राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर आप (धामी) एक अभिभावक का कर्तव्य निभा सकते हैं। उन्होंने सीएम को रेलवे से बातचीत करने, गोला नदी के किनारे-किनारे रिवरफ्रंट डेवलप कर कुछ अतिरिक्त भूमि निकालकर रेलवे की जरूरत की पूर्ति करने की सलाह दी है।

