Monday, September 14, 2026
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उत्तराखंड

बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू

चमोली। बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो गई है। सुबह बदरीनाथ भगवान के अभिषेक के साथ गणेश मंदिर में भी विशेष पूजाएं शुरू हुई। इसके बाद विधि-विधान से मंदिर के कपाट बंद कर लिए जाएंगे। 22 को आदिकेदारेश्वर मंदिर के कपाट बंद होंगे। 23 को बदरीनाथ मंदिर के सभा मंडप में धार्मिक पुस्तक पूजन व वेद ऋचाओं का वाचन बंद हो जाएगा। 24 को धाम परिसर में माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित किया जाएगा। लक्ष्मी मंदिर में विशेष पूजाएं भी होंगी। 25 नवंबर को दोपहर दो बजकर 56 मिनट पर विधि-विधान के साथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
बदरीनाथ धाम में कपाट बंद करने से पहले होने वाली पंच पूजाओं का विशेष धार्मिक महत्व है। लोक मान्यता के अनुसार पंच पूजाओं के दौरान धाम में देवताओं का आगमन शुरू हो जाता है और कपाट बंद होने के बाद छह माह तक बदरीविशाल की पूजा-अर्चना का अधिकार देवताओं का होता है। बदरीनाथ धाम में कपाट बंद होने से पांच दिन पहले पंच पूजाएं शुरू हो जाती हैं। विभिन्न मंदिरों में इस सीजन की अंतिम पूजाएं करने के बाद उन मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इसे ही पंच पूजाएं कहा जाता है। बदरीनाथ की पंच पूजाएं अनूठी होती हैं। मंदिर में पंच पूजाओं की शुरुआत गणेश मंदिर से होती है। सभी मंदिरों में अंतिम दिन पूजा-अर्चना रावल की ओर से की जाती है। विभिन्न पूजाएं करने के बाद गणेश मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।दूसरे दिन आदिकेदारेश्वर मंदिर में अन्नकूट का आयोजन होता है। भगवान भोलेनाथ को पके चावलों का भोग लगाया जाता है और शिवलिंग को अन्नकूट से ढक दिया जाता है। इसके बाद मंदिर के कपाट बंद कर लिए जाते हैं। तीसरे दिन खड़क पुस्तक पूजन और वेद ऋचाओं का वाचन बंद होगा, चौथे दिन माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद विधि विधान से बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

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