उत्तराखंड

एम्स पहुंचे वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डा. दीपक गुप्ता, बोले -अंगदान से बचा सकते हैं जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन

 

ऋषिकेश। दिल्ली एम्स के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. दीपक गुप्ता ने कहा कि अंगदान के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना जरूरी है। ब्रेन डेथ हो चुके व्यक्ति के अंगों से जरूरतमंद व्यक्तियों की जान बचाई जा सकती है। यह बातें उन्होंने शनिवार को एम्स ऋषिकेश के सभागार में आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने बताया कि कोमा में चले जाने की स्थिति में व्यक्ति जीवित रहता है और ठीक भी हो सकता है, लेकिन ब्रेन डेथ अवस्था से व्यक्ति जीवित नहीं हो सकता है। इसलिए यदि परिजन ऐसे व्यक्ति के अंगदान करवा दें तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि अंगदान के मामले में भारत देश 68वीं रैंक में है, जबकि सबसे पहले अपनी हड्डियों का दान करने वाले महर्षि दधीचि इसी भारत भूमि पर ही जन्मे थे। बताया कि देश में प्रति वर्ष डेढ़ लाख लोगों की सड़क दुर्घटना में और 50 हजार से अधिक लोगों की मृत्यु धूम्रपान के कारणों से हो जाती है। यदि इस प्रकार के लोगों की मृत्यु होने से पहले इलाज करने वाले चिकित्सक ब्रेन डेथ स्थिति की जांच कर लें और परिजनों को अंगदान के प्रति जागरूक कर अंगदान करवा दें तो प्रतिवर्ष देश के हजारों लोगों का जीवन बच सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष इस प्रकार के मामलों में हुई 5 लाख मौतों में से केवल 1128 लोगों को परिजनों को ही अंगदान के प्रति प्रेरित किया जा सका। कहा कि इसकी जागरूकता के लिए सामूहिक कदम उठाने होंगे। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने मेडिकल छात्रों से आह्वान किया कि वो अंगदान की महत्ता समझ कर लोगों में अंगदान के प्रति जागरूकता लाने के लिए संदेश संवाहक के तौर पर भूमिका निभाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *