संस्कृत महाविद्यालयों व विद्यालयों में खाली हैं भारी संख्या में पद

 

देहरादून। संस्कृत शिक्षा की वेबसाइट में दी गई जानकारी के अनुसार राज्य में निदेशालय स्तर पर निदेशक से लेकर चतुर्थ श्रेणी तक कुल करीब 50 फीसदी पद खाली है। संस्कृत शिक्षा परिषद में कुल 9 पदों में से 1 पद खाली हैं, जिला स्तर पर कुल 16 पद ढांचे में है, जिसमें से करीब 50 फीसदी पद खाली है। अशासकीय विद्यालय और महाविद्यालय में कुल 488 पदों में से वेबसाइट के अनुसार 209 पद खाली है, राजकीय महाविद्यालयों और विद्यालयों में कुल 126 पदों में से 124 पद खाली है। जाहिर है कि यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इन्हीं हालातों को देखकर शायद कांग्रेस संस्कृत को लेकर भाजपा सरकारों की तरफ से किए जा रहे प्रयासों या निर्णयों को राजनीतिक मानती हैं।संस्कृत भाषा पर लिए गए निर्णय को लेकर कांग्रेस की एंट्री होते ही भाजपा ने भी पलटवार करने में देरी नहीं की, भाजपा ने कहा कि आज देश ने कांग्रेस को पूरी तरह से नकार दिया है। ऐसे में संस्कृत भाषा को लेकर कांग्रेस जो बात कह रही है। उससे जनता को भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। भाजपा नेता ने कहा कि सनातन धर्म में संस्कृत का अहम हिस्सा है। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है लिहाजा, भाजपा इसको लेकर बेहद गंभीर है।

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