Wednesday, August 26, 2026
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उत्तराखंड में 159 लोगों को सीएए के तहत मिलेगी भारत की नागरिकता

देहरादून।  मोदी सरकार के चर्चित सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट 2019 (सीएए) के तहत उत्तराखंड में रहने वाले 159 हिंदू शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलने जा रही है। सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सीएए में संशोधन करके भारत में शरण लेने वाले हिंदू परिवारों की परेशानियों को दूर किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ऐसे नागरिकों की चिंता की जो कि सालों से भारत में नागरिकता के लिए भटक रहे थे। मालूम हो कि मोदी सरकार ने संसद में सीएए यानि नागरिक संशोधन अधिनियम 1955 में सुधार करते हुए 2019 में बिल पास किया था, जिसे राष्ट्रपति ने मंजूरी दी थी। उस समय संसद में विपक्ष के भारी शोरगुल के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने एक्ट में संशोधन की जरूरत को सामने रखा था। इस संशोधन में 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में शरण लेने आए हिंदुओं को भारत की नागरिकता देने का फैसला मोदी सरकार ने लिया था। हालांकि केंद्र सरकार के इस फैसले का काफी राजनीतिक विरेाध भी हुआ था,लेकिन सरकार अपने फैसले पर अडिग रही थी। इस ऐक्ट के तहत भारत में अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश या किसी भी अन्य देश से आने वाले हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई लोगों को भारत की नागरिकता दिए जाने की सूची में रखा गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सात मार्च को उत्तराखंड दौरे पर आने वाले है। हरिद्वार में उनके कार्यक्रम में भारत की नागरिकता प्राप्त करने वालों का सम्मान किया जाएगा।
पाक के सिंध और बलूचिस्तान से आए हैं ज्यादातर परिवार :
उत्तराखंड में रह रहे लोगों में 153 पाकिस्तान और छह अफगानिस्तान से आए हैं। इनमें ज्यादातर हिन्दू पाकिस्तान के सिंध, बलूचिस्तान से हैं। इन लोगों के रिश्तेदार देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर क्षेत्र में रहते हैं। इस वजह से इन्हें यहां आश्रय मिला था। ऐसी भी जानकारी मिली है कि अखंड भारत के शक्तिपीठों में से एक माता हिंगलाज मंदिर के पुजारी परिवार ने भी भारत में शरण ली हुई थी, उन्हें भी नागरिकता दी जा रही है।

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